December 3, 2020

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विश्व स्तन पान दिवस : जीवन भर की इम्‍युनिटी प्रदान करता है मां का दूध

कोरोना काल में हर व्‍यक्ति इस वक्त इम्‍युनिटी के पीछे भाग रहा है। बाज़ार में इम्‍युनिटी बूस्टर धड़ल्ले से बिक रहे हैं, और घर पर लोग तमाम तरह के उपाय कर रहे हैं।

लेकिन अगर प्राकृतिक इम्‍युनिटी बूस्टर की बात करें तो वो है मॉं का दूध। जी हां मॉं के दूध में पाये जाने वाले पोषक तत्व बच्‍चे को केवल बालकाल में ही नहीं बल्कि जीवन भर इम्‍युनिटी प्रदान करते हैं। विश्व स्तनपान सप्ताह कल से शुरू हो रहा है तो इस सप्‍ताह स्‍तनपान पर बात करना तो बनता है।

हर साल अगस्त माह के पहले सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक विश्‍व स्तन पान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का महत्व आप इसी बात से समझ सकते हैं, कि आम तौर पर डॉक्‍टर्स डे, मदर्स डे, फादर्स डे, आदि केवल एक दिन मनाया जाता है, लेकिन स्तन पान दिवस को पूरी दुनिया में सात दिन तक सेलेब्रेट किया जाता है। इस सप्‍ताह को मनाने का मुख्‍य उद्देश्‍य स्तनपान के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

इसकी शुरुआत 1991 में महिलायों के बीच स्तनपान को लेकर जागरूकता फैलाने से हुई थी। हर वर्ष इसे एक नए विषय के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है- “स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प”।

क्या है डॉक्टर की सलाह

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल ऑफीसर डॉ. दलवीर सिंह की मानें तो नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) संपूर्ण आहार होता है। जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए।

इसके अलावा सामान्यत: बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक नियमित रूप से स्तनपान कराते रहना चाहिए। शिशु को 6 महीने की अवस्था के बाद भी लगभग दो वर्ष तक अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराते रहना चाहिए। साथ ही साथ छह माह के बाद बच्चे को पौष्टिक पूरक आहार भी देने शुरू कर देना चाहिए।

कोरोना काल में स्तनपान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

  • शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाएं और पहले 6 महीने सिर्फ स्तनपान कराएं।
  • यदि मां कोविड से संक्रमित है या उसकी संभावना है तब भी मां शिशु को स्तनपान करा सकती है।
  • यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड से संक्रमित है और यदि वह दूध पी पा रहा है तो मां अवश्य शिशु को स्तनपान करायें।

बच्चे को स्तनपान से लाभ

डॉ. दलबीन के अनुसार मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते है। मां का दूध पचने में त्वरित और आसान होता है । यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षित करता है।

  • यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है।
  • यह किफ़ायती और संक्रमण मुक्त होता है।
  • स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक बंधन को बढ़ाता है। मां को स्तनपान कराने के लाभ
  • यह स्तन व डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है।
  • यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है।
  • यह मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायता करता हैं।
  • स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा सामान्यत: कम पाया जाता है।

(इनपुट-हिन्दुस्थान समाचार)

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