August 23, 2020

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Explainer: असम चुनाव में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी से गठबंधन की तैयारी में कांग्रेस, कितनी बदल जाएगी राजनीति?

हाइलाइट्स:

  • असम में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के बीच बढ़ रही हैं नजदीकियां
  • कहा जा रहा है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों में हो सकता है गठबंधन
  • इस गठबंधन के सामने आ जाने पर बीजेपी के सामने खड़ी हो सकती है बड़ी चुनौती

गुवाहाटी
असम में साल 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। साल 2006 में जब चुनाव हो रहे थे तो तत्कालीन सीएम और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने कहा था कि ‘बदरुद्दीन कौन है?’, आज आलम यह है कि कांग्रेस पार्टी उन्हीं बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) से गठबंधन की तैयारी कर रही है। कारण यह है कि बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ने बंगाली मुस्लिमों को अपनी पार्टी की ओर खींचा है और अब उसका आधार भी बढ़ गया है।अब मार्च 2020 में आते हैं, जब बदरुद्दीन अजमल और तरुण गोगोई हाथ में हाथ डालकर विधानसभा से बाहर आए। मौका था एआईयूडीएफ और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार और वरिष्ठ पत्रकार अजीत कुमार भुयन के राज्यसभा के नामांकन का। अजीत कुमार भुयन आखिर में चुनाव जीत गए। इस गठबंधन का यह नतीजा रहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव के लिए एआईयूडीएफ और कांग्रेस का गठबंधन होने वाला है और जल्द ही इसका ऐलान भी होने वाला है।

एआईयूडीएफ पर लगते रहे हैं बी टीम होने के आरोप

तरुण गोगोई ने ही कई बार कहा है कि एआईयूडीएफ सांप्रदायिक पार्टी है और वह बीजेपी की टीम बी है। उन्होंने यह भी कहा था कि बदरुद्दीन की पार्टी कांग्रेस के वोट काटने के लिए खड़ी होती है। वहीं, बीजेपी भी आरोपी लगाती रही है कि कांग्रेस-एआईयूडीएफ के बीच छिपा हुआ समझौता है। हालांकि, कांग्रेस हमेशा इस बात से इनकार करती रही है।

2019 के लोकसभा चुनाव में भी तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के खिलाफ एआईयूडीएफ ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। आखिर में गौरव गोगोई कलियाबोर सीट से चुनाव जीत गए। हालांकि, पहले भी ऐसे गठबंधन को लेकर चर्चा हुई है लेकिन कोई आधिकारिक समझौता नहीं हो पाया है। कांग्रेस के नेता रिपुन बोरा ने कहा है कि उनकी पार्टी बीजेपी के खिलाफ एख मोर्चा बनाने के लिए लेफ्ट और एआईयूडीएफ के साथ आने की अपील की है।

बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने की तैयारी

रिपुन बोरा ने बताया कि 2016 के चुनाव में बीजेपी, एजीपी, बीपीएफ और अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी। हम अकेले लड़े थे। इस बार हम गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ेंगे। वहीं, एआईयूडीएफ के सचिव अमिनुल इस्लाम ने कहा कि हमें पुराने मतभेद भुलाने होंगे और असम के लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए काम करना होगा। हमें उम्मीद है कि अखिल गोगोई के नेतृत्व वाली कृषक मुक्ति संग्राम समिति, लेफ्ट और अजीत भुयन की पार्टी हमारे साथ आएगी।

कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस और एआईयूडीएफ के नेतृत्व में बाकी पार्टियां भी साथ आती हैं तो विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चुनौती मिल सकती है। बीजेपी के खिलाफ एनआरसी और सीएए के मुद्दे को लेकर आम जनता में नाराजगी भी है। इस नाराजगी का जिक्र बीजेपी के ही विधायक कई बार सीएम सर्वानंद सोनोवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से कर चुके हैं।

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