August 23, 2020

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Exclusive: रोजा गर्ल मधू बोलीं – 4 दिन शूट के बाद फिल्म से आउट कर दिया, डिप्रेशन में चली गई थी मैं

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बॉलिवुड ऐक्टर अजय देवगन ( Ajay Devgn ) की फिल्म ‘फूल और कांटे‘ और निर्देशक मणि रत्नम ( Director Mani Ratnam ) की ‘रोजा’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखने वालीं बेहतरीन ऐक्ट्रेस मधू ( मधू शाह – Madhoo ) ने नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से हुई Exclusive लाइव चैट में बताया कि उनकी पहली साइन की हुई हिंदी फिल्म Phool Aur Kaante नहीं थी। खुद को कमतर, दबा हुआ महसूस करने लगी थी
मुझे मेरी पहली फिल्म में साइन किया गया, 4 दिन तक मेरे साथ फिल्म के डायरेक्टर और प्रड्यूसर ने शूटिंग की और बाद में मुझे बिना इन्फॉर्म किए ही फिल्म से बाहर कर दिया गया। वैसे यह बहुत पुरानी बात है, 30 साल बीत चुके हैं, ऐसे में अब आज मैं उस डायरेक्टर-प्रड्यूसर का नाम लूंगी तो ठीक बात नहीं होगी। जब मुझे फिल्म से आउट किया गया तो मैं उस वक्त खुद को बहुत ही कमतर, दबा हुआ महसूस कर रही थी।

यह बात मेरे लिए लाइफ चेंजिंग घटना भी थी
रिजेक्ट किया गया तो डिप्रेस भी हो गई थी। अब मेरी उम्र ही क्या थी उस समय, बहुत छोटी लड़की थी, जिसे डायरेक्टर – प्रड्यूसर ने सिलेक्ट कर बाद में रिप्लेस कर दिया। यह रिजेक्शन की बात मेरे लिए लाइफ चेंजिंग घटना भी थी।

दर्द में रात भर रोया करती थी, लेकिन…
रिजेक्शन के दर्द और तकलीफ से मुझे मेरे कॉलेज के दोस्त, मेरे भाई और परिवार ने निकाला। रात में अपने बेडरूम में रोया करती थी, लेकिन सुबह उठकर कॉलेज जाना, लोगों से मिलना और भाई और पापा से बातचीत करना होता था, इस तरह समय निकल जाता था। बहुत ज्यादा सोचती नहीं थी कि डिप्रेश हो गई हूं।

जितनी बार रिजेक्शन याद करो, उतनी बार खुद को सजा मिलेगी
मैं बहुत ज्यादा किसी चीज के बारे में नहीं सोचती हूं। क्योंकि कई बार ज्यादा सोचने से फीलिंग खत्म हो जाती है, लेकिन सोच और एनालिसिस करने का काम नहीं रुकता है। आप जितनी बार अपने दिमाग को रिजेक्शन की याद दिलाएंगे, उतनी बार आपको सजा मिलेगी और आप ट्रैप्ड फील करेंगे।

रिप्लेस होने की वजह आज तक नहीं पता
फिल्म के डायरेक्टर और प्रड्यूसर ने मुझे फिल्म से आउट करने का कोई कारण भी नहीं बताया, इसी बात का मुझे सबसे बड़ा दुःख था। मुझे तो ट्रेड न्यूज़ पेपर के द्वारा पता चला कि मुझे रिप्लेस कर दिया गया है। फिल्म के वर्कशाप और अच्छी तैयारी के लिए डायरेक्टर – प्रड्यूसर ने रोशन तनेजा के पास भेजा था और उन्होंने रोशन तनेजा जी को ही बताया कि उन्होंने में फिल्म में रिप्लेस कर दिया है।

इस लड़की को फोन उठाना ही नहीं आता है, यह ऐक्टिंग क्या करेगी?
जब तनेजा सर ने पूछा कि आपने मधू को क्यों बाहर किया तो उन्होंने जवाब में कहा था कि इस लड़की को फोन उठाना ही नहीं आता है यह ऐक्टिंग क्या करेगी? रोशन तनेजा, डायरेक्टर और प्रड्यूसर की बात सुनकर बहुत हैरान थे, क्योंकि तनेजा सर मेरी ऐक्टिंग स्किल से काफी इम्प्रेस थे। डायरेक्टर-प्रड्यूसर ने मुझे मेरे मेरे पापा के रिकॉर्डिंग में देखकर सिलेक्ट कर लिया था। बाद में उन्होंने फिल्म की तैयारी के लिए 10 दिन के लिए रोशन जी के पास मुझे भेजा था। उस फिल्म में भाबी जी घर पर हैं फेम आसिफ शेख मेरे हीरो होने वाले थे।

रोने-धोने के बाद मैं जुट गई थी ट्रेनिंग में
जब हम किसी दर्द के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचते हैं तो वह सोच हमें दर्द से बाहर नहीं निकलने देती है। कहने का मतलब है आप किसी जितना ज्यादा सोचेंगे, उतनी ज्यादा तकलीफ होगी। उस रिजेक्शन के बाद जितना भी मुझे रोना और फील करना था, मैंने वह किया और बाद में अपनी ट्रेनिंग में जुट गई थी। पूरी जिंदगी उस रिजेक्शन को लेकर नहीं रही।

‘फूल और कांटे’ के दौरान ट्रेंड होकर आई थी
ज्यादा दिनों तक अपने आप रिजेक्ट फील नहीं कर सकती थी इसलिए ऐक्टिंग, डांस, वजन और खुद को एक बेहतरीन हिरोइन बनाने के काम में जुट गई। जैसे डॉक्टर बनने के लिए आपको पढ़ाई और ट्रेनिंग करनी पड़ती है, ठीक उसी तरह ऐक्टिंग की खूब पढ़ाई और ट्रेनिंग है। इस सब काम में मुझे 2 साल लगे। 2 साल बाद जब फिल्म फूल और कांटे में एंट्री की तो ट्रेंड होकर आई थी, अब बहुत अच्छे से समझती थी कि लोगों से मिलना-जुलना कैसे है, कैसे ऐक्टिंग करना है, लोगों के सामने कैसे आना है और कैमरा ऐंगल क्या है। 90 के दशक में आज की तरह डिप्रेशन पर चर्चा नहीं होती थी
यह रिजेक्शन का समय आपको दुःखी तो करता है, लेकिन आगे बढ़ना भी रिजेक्शन ही सिखाता है। हम 90 के दशक में इस तरह के रिजेक्शन को लेकर बहुत ज्यादा बातचीत और सोचने का काम नहीं करते थे। आज इमोशंस और मेंटल हेल्थ को लेकर बहुत चर्चा होती है, हम लोग यह सब बिल्कुल नहीं करते थे।

उस घटना को चैलेंज की तरह ले लिया
जब आज उस घटना के बारे में सोचती हूं तो आज मैं जहां भी हूं, सोचती हूं कि अगर वह घटना नहीं हुई होती तो आज यहां नहीं होती। मैंने खुद को फिल्म से निकाले जाने को एक चैलेंज की तरह लिया और मेरे अंदर एक ताकत और उत्साह का संचार अपने आप हो गया कि मैं अपनी जिंदगी को बहुत आगे लेकर जाऊंगी। मैंने खुद को आगे ले जाने के लिए जमकर मेहनत करनी शुरू की, खुद को हर मामले में बेहतर बनाने के लिए खूब काम किया। सबसे पहले रोशन तनेजा सर की ऐक्टिंग स्कूल में अभिनय और डिक्शन की क्लास शुरू की।

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