August 22, 2020

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Covid-19 Crisis: क्या बिहार में बढ़ सकती है चुनाव खर्च की सीमा, ECI कर रहा विचार

हाइलाइट्स:

  • बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने तेज की तैयारी
  • कोरोना संकट के मद्देनजर उम्मीदवारों के खर्च की सीमा में हो सकता है इजाफा
  • चुनाव आयोग की ओर से बनाई गई अधिकारियों की एक समिति
  • उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की सीमा 28 लाख रुपये है निर्धारित

नई दिल्ली
बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। कोरोना संकट के मद्देनजर आयोग ने मास्क का इस्तेमाल करने उम्मीदवारों के ऑनलाइन नामांकन समेत कई जरूरी निर्देश जारी किए हैं। इसी के साथ एक और चर्चा शुरू हो गई है कि क्या निर्वाचन आयोग इस बार उम्मीदवारों के चुनावी खर्च में भी कोई बढ़ोतरी करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, आयोग कोविड-19 के मद्देनजर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा में वृद्धि पर विचार कर रहा है। उम्मीदवारों के खर्च में बढ़ोतरी की उठी मांग
दरअसल, कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सियासी दल डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार पर फोकस कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और लोगों की भीड़ नहीं जुटे इसके लिए ऑनलाइन माध्यम के जरिए लोगों से जुड़ने की कवायद की जा रही है। इसी को देखते हुए बीजेपी समेत कई राजनीतिक पार्टियों की ओर से चुनावी खर्च में इजाफे की मांग की गई है। सियासी दलों के मुताबिक, चुनाव अभियान के दौरान कोरोना संकट के मद्देनजर पार्टी कार्यकर्ताओं और वोटर्स के लिए मास्क और सैनिटाइटर व्यवस्था करनी होगी, ऐसे में चुनाव खर्च की सीमा बढ़ाया जाना चाहिए।

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चुनाव आयोग ने बनाई समिति
पूरे मामले में चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जो उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की सीमा में बढ़ोतरी की मांग पर विचार करेगा। फिलहाल उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की सीमा 28 लाख रुपये निर्धारित है। हालांकि, कोरोना संकट के मद्देनजर इसमें किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत है, इस पर चुनाव आयोग की ओर से गठित कमेटी विचार-विमर्श के बाद अपनी राय देगी। चुनाव आचार संहिता के नियम 90 में इलेक्शन खर्च की सीमा का जिक्र किया गया है और इसमें किसी भी तरह के बदलाव को लेकर कानून मंत्रालय की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

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वर्तमान में 28 लाख है उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की सीमा
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि कई सियासी दलों ने कहा है कि डिजिटल चुनाव प्रचार में होने वाला खर्च आम तौर पर सामान्य से अधिक होता है। ऐसे में आयोग को उम्मीदवार के चुनावी खर्च को लेकर तय की गई 28 लाख रुपये की सीमा के बारे में फिर से विचार करना चाहिए। दूसरी ओर चुनाव समिति की नजर इस बात पर भी है कई राजनीतिक दलों ने कहा है कि उनके पास डिजिटल चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त फंड नहीं है, ऐसे में उन्हें डोर-टू-डोर कैंपेन की छूट दी जाए। जिसको लेकर चुनाव आयोग ने सीमित तरीके से डोर-टू-डोर कैंपेन का फैसला लिया है।

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