April 12, 2021

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जानिए कहां तक पहुंचा वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा देश में COVID संक्रमण से बचाव के लिए 16 तरह के टीकों का परीक्षण विभिन्न चरणों में है। सभी वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। अगली स्टेज के लिए अलग-अलग शहरों को चुना गया है।

डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप की मानें तो इन शहरों को साइट ट्रायल के लिए चुना गया है। प्रसार भारती से बातचीत में डॉ. रेणु ने बताया कि वैक्सीन को लेकर जो भी प्रयास जारी हैं उनमें डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी सभी मंत्रालय के साथ ट्रायल को लीड कर रहा है। वैक्सीन के 16 कैंडिडेट्स हैं, जो अलग-अलग स्टेज पर हैं। जाइडस कैडिला और भारत बायोटेक की जो वैत्सीन है, वो फेज वन और फेज टू में पहुंच गई है। 5-6 और वैक्सीन कंपनियां हैं जो काफी एडवांस स्टेज में हैं। इसके अलावा सीरम इंस्टीट्यूट एक बीसीजी का भी ट्रायल कर रहा है और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटभ्‍ अपनी वैक्सीन का फेज 3 का ट्रायल भारत में करेगी।

डॉ. रेणु के अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी ने फेज-3 के लिए पांच क्लिनिकल ट्रायल साइट्स को भी तैयार कर दिया है, फरीदाबाद, भुवनेश्वर, नई दिल्ली, पुणे और बेंगलुरू में बनाया गया है। साथ ही 6 साइट्स को और तैयार करना है। सभी वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उत्पादक लगे हुए हैं कि वैक्सीन को एक-एक स्टेज पर सफलता पूर्वक आगे पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि खास बात यह है कि वैक्सीन का ट्रायल स्वस्थ्य व्यक्तियों पर होता है। उनकी सुरक्षा और इम्युनिटी समेत कई चीजों का ध्यान रखना होता है। प्रत्‍येक व्‍यक्ति की कई प्रकार की जांच की जाती है। ।

कोरोना टेस्ट करने के लिए एक स्वदेशी टेस्टिंग किट का उतापदन भारत में हो रहा है। इस पर डॉ रेणु ने कहा कि जब कोरोना शुरू हुआ था, तब सभी किट बाहर से आयात की जाती थीं। 26 मार्च को पहले इंडियन मैन्युफैक्चर्स ने आईसीएमआर और डीसीजीआई की देखरेख में किट बनाना शुरू किया। तब से लेकर अब तक स्वदेशी मैन्युफैक्चरर्स की क्षमता बहुत बढ़ गई है। अब पांच लाख किट हर रोज बनाई जा रही हैं। सिर्फ किट्स ही नहीं बल्कि उनके कंपोनेंट्स भी भारत में बनने लगे हैं। देश की कई स्टार्ट-अप और छोटी कंपनियां आगे आयी हैं।

देश में सार्स COVID-2 के एक हजार जीनोम को क्रमबद्ध करने का काम पूरा कर लिया गया है। इसके फायदे के बारे में उन्होंने कहा कि वायरस को समझना बहुत जरूरी है। जिनोम में कोविड से जुड़ी सूचनाओं का जो डेटा बेस तैयार किया गया है। वह कोरोना वायरस के स्वभाव को समझने में मदद करेगा, जिससे महामारी के संक्रमण को रोकने में सहायता मिलेगी। इससे पता चलेगा कि उसका ट्रांसमिशन या इंफेक्शन रेट क्या है।

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