December 3, 2020

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सर्वाइकल स्पोंडिलॉसिस के कारण और उपचार

क्यों होती है ये समस्या और कैसे इससे बच सकते हैं।

गर्दन में दर्द एक आम समस्या है। अक्सर लोग गर्दन में दर्द होने पर उसे नजरअंदाज करते हैं, लेकिन कई बार सर्वाइकल स्पोंडिलॉसिस होता है, जो आगे चल कर गंभीर और असहनीय दर्द में बदल जाता है। सर्वाइकल स्पोंडिलॉसिस काफी लोगों को प्रभावित करती है। जिसे वक्त पर इलाज न मिलने पर परेशानी और बढ़ जाती है।

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. भावुक की मानें तो जिस तरह से शरीर के बाल समय रहते सफेद हो जाते हैं, उसी प्रकार गर्दन की हड्डियां भी समय के साथ कमजोर और बूढ़ी होने लगती हैं। ऐसा किसी एक में नहीं बल्कि अलग-अलग तरह के लोगों में अलग-अलग प्रकार से पाया जाता है। हड्ड‍ियां कितनी कमजोर पड़ेंगी यह निर्भर करता है व्‍यक्ति के काम पर। जैसे लोग कंप्यूटर पर काम ज्‍यादा करते हैं, टाइपिस्ट हैं उनमें अलग तरह के प्रभाव पड़ते हैं, जबकि भार उठाने वाले मजदूरों पर अलग प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं।

सर्वाइकल स्पोंडिलॉसिस के लक्षण

इसमें गर्दन में असहनीय दर्द होता है। वो भी गर्दन से मीड लाइन जाती है वहां पर। कई बार कंधों में भी दर्द होता है और यह दर्द हाथों तक पहुंच जाता है। हाथ में झनझनाहट या करंट जैसा महसूस होता है। गंभीर लक्षण में पैरों और हाथों में भी कमज़ोरी हो सकती है, चलने में लड़खड़ाहट हो सकती है। कई मरीजों में गंभीर होने पर टॉयलेट आदि का कंट्रोल भी खत्म हो जा सकता है।

सर्वाइकल स्पोंडिलॉसिस के बचाव

इससे बचने के लिए बचाव ही सबसे अच्छा रास्ता है, इसलिए प्रतिदिन गर्दन से जुड़े अभ्यास करने चाहिए। बैठ कर काम करते वक्त बैठने के तरीके पर ध्यान दें बहुत झुक कर काम न करें और गर्दन पर भार न जाने दें। सिगरेट आदि का सेवन न करें। कंप्यूटर पर बैठते वक्त स्क्रीन आंखों के लेवल तक आये। आराम दायक कुर्सी पर बैठें, कुर्सी पर हाथ आराम से रख सकें जिससे भार गर्दन पर न पड़े।

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